इंकलाब

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जुनून- ए- इंकलाब क्यों न हो,
हैवानियत से लड़ने की,
दर्द- ए-दिल क्यों न हो,
भूखे बच्चों के बिलखने की ।

सरजमीं अपनी, मुल्क अपना,
क्यों न छीन लें हक़ अपना,
क्यों न बात हो मैंदान- ए- जंग की,
जब गूंजती हो आवाज सिसकने की।

उबाल नहीं जब खून की,
फिर आरजू- ए – जिंदगानी किस काम की,
ख्वाहिश क्या उस जान की,
जो काम न आए हिन्दुस्तान की।

  • उदय वीर चौधरी

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